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- घमंड का सिर नीचा
- घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध
- घर की बात बाहर नहीं फैलानी चाहिए
- घर की बात बाहर नहीं ले जाते
- घर की मुर्गी दाल बराबर
- घर की शांति में पत्नी की ख़ुशी ज़रूरी है
- घर को घर बनाने में उम्र बीत जाती है
- घर जैसा सुख कहीं नहीं
- घर में फूट हो तो घर नहीं टिकता
- घर ही आदमी का किला होता है
- घर ही आदमी की असली दुनिया है
- घास में छुपा साँप
- घोड़ा नहीं, सवार देखो
- घंटी कौन बाँधेगा
- चढ़ते सूरज को सब सलाम करते हैं
- चमत्कारों का ज़माना गया
- चलता है, जैसे तैसे कट रही है
- चलता है तो चलने दो
- चलती गाड़ी को धक्का नहीं देते
- चला गया तो याद आया
- चापलूसी से काम नहीं चलता
- चाल चलन बचपन से ही दिख जाता है
- चालीस के बाद ही असली समझ आती है
- चिंगारी से आग भड़कती है
- चिंता चिता के समान है
- चुगली करने वाला कभी सुखी नहीं रहता
- चुगली करने वाला खुद ही गड्ढे में गिरता है
- चुगली करने वाला खुद ही मुसीबत बुलाता है
- चुप्पी भी सहमति मानी जाती है
- चोर की दाढ़ी में तिनका
- चोर की नींद हराम होती है
- चोर-चोर मौसेरे भाई
- चोर चोर मौसेरे भाई, अंत में पकड़े जाएँ
- चोर चोर ही रहता है
- चोर से चोर पकड़ा जाता है
- चोरों में भी कुछ उसूल होते हैं
- चोला बदलने से चित्त नहीं बदलता
- छोटा पैकेट बड़ा धमाका
- छोटा पैकेट, बड़ा धमाका
- छोटी‑छोटी बातें ही बड़ी बन जाती हैं
- छोटी बातों का बतंगड़ मत बनाओ
- जगह ही सब कुछ है
- जड़ता मूर्खता की निशानी है
- जनता की आवाज ही भगवान की आवाज है
- जनता के स्वाद पर शक करोगे तो घाटे में रहोगे
- जन्म लिया है तो मरना भी पड़ेगा
- जब चिड़िया चुग गई खेत तब क्या पछताना
- जब चिड़िया चुग गई खेत तब पछताने से क्या फायदा
- जब तक घास उगेगी तब तक घोड़ा मर जाएगा
- जब तक चीज़ हाथ में रहती है उसकी क़दर नहीं होती